एक
जिस जेल को मैंने
तुम्हारे जाने के बाद
अपने भीतर ढहाया-
काश!
उस जेल को
बस एक दिन पहले ढहा पाता..!
दो
उधर तुम अपने घरवालों को नस काट लेने की धमकी देती
इधर मैं अपने कमरे के पंखे पर फंदा लटका कर उदास बैठा रहता-
काश!
हमेशा-हमेशा के लिए
सूख जाने वाली दो नदियों में
किसी एक ने तो कोई पत्थर फेंका होता!
तीन
तुम भी कितनी अलग तरह की भूतपूर्व प्रेमिका हो मेरी
कि जिस प्यार को मैं
अपनी कनपटी पर गोली मारकर साबित करना चाहता था
अब उसी प्यार को साबित करने के लिए इन्हीं कनपटियों पर ज़ोर देकर..
हर महीने अपनी गृहस्थी के राशन-पानी का हिसाब बिठाता हूँ!
चार
होना तो यह चाहिए था
कि हम दोनों के माँ-बाप मूर्ख साबित होते..
हुआ यह कि हम दोनों ही मूर्ख साबित हो गए!
पाँच
सरफ़रोश के आमिर खान की तरह दब्बू बनकर रहता प्यार में
दिल ही दिल में भर्राए गले से गाता -
"हम लबों से कह न पाए उनसे हाले दिल कभी"
और तुम सोनाली बेंद्रे की तरह नटखट-सी मुझ संग शरारतें करती
हार कर मुझसे कह ही देती -
"यह लड़का हाए अल्लाह कैसा है दीवाना"
मगर अफ़सोस कि फ़िल्म नसीब के गोविंदा की तरह
अपनी कविताओं की हवेली में अकेला पड़ा रहता हूँ अब
और उस ममता कुलकर्णी को मेरी हालत का अंदाज़ा तक नहीं!
छह



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