वो मौन थी कविताओं में
एक
वो कविताओं में मौन थी
मैंने कविताओं को बिखेर दिया
नदियाँ, हवाओं, पर्वतों, पेड़ों, चिडियों के बीच
अब वो उड़ रही थी, दौड़ रही थी, बह रही थी
कविताओं का निर्माण उसकी चुप्पियों के लिए नहीं किया गया
बल्कि निर्माण किये गए थे शब्द उसके लिए
चुप रहने और सहने की क्रियाओं के विरुद्ध
अपना पक्ष रखने के लिए।
दो
वो कविताओं में किसी बच्ची-सी दिख रही थी
जिसका ब्याह एक सुंदर लड़के से हो रहा था
जिसे थी एक अच्छी नौकरी
और अगर ये ब्याह न होता
तो एक अच्छे लड़के की दुल्हन बनने से चूक जाती वो
और अच्छा लड़का मिलना बहुत मुश्किल है न इस समय में
इसलिए ब्याही गयी वो कम उम्र में।
तीन
अच्छा तो कवि ने कविताएं लिखी ऊनपर
कविताओं को किसने पढ़ा?
- उसके बच्चों ने
उसके बच्चे बोल रहे क्या?
- वो हँस रहे
क्यों हँस रहे?
- उन्होंने कहा -
"ब्याह के वक़्त कवि चुप था
उसने खायी थी चार मिठाईयां
कुछ पूरियाँ और ढेर सारी सब्जी
ऐसा माँ कहती है"
झूठा कवि था
माँ को देखा
और ज़ोर से हँसा था
बोला कि ये बच्ची है
इसे कैसे कोई भाभी बोले
फिर उसने लिखी कविताएं
और छपवाई पत्रिकाओं में
जिसमें लिखी बहुत बुराई
अपने अंदर में जो थी छुपाई
बोला बाल विवाह तो बहुत बुरी है
बहुत बुरी है
इसे मिटाओ
ये पाप है
दुनिया वालों जागो जल्दी
इसे मिटाओ
इसे मिटाओ।
लिखकर उसने कविताओं को
फिर एक बच्ची से ब्याह किया था
और उसे सुनाई वो कविताएं
लिखी गयी थी जो बाल विवाह पर
वो मौन थी कविताओं में।
स्वर्ग की अनुभूति
किसी शाम
घर की ओर लौटते हुए
पंक्षियों की चहचहाहट के बीच
किसी एकांत जगह
तुम्हारे होठों से किसी मधुर गीत को सुनते हुए
मैं देना चाहूंगा निमंत्रण
उस ईश्वर को
ताकि उन्हें भी हो
धरती पर स्वर्ग की अनुभूति।
जब मैं बोलता हूँ
लोग अक्सर कहते
मैं नहीं बोलता
मैं कर लेता हूँ कैद अपनी बातें
अपने मुँह के अंदर
और ओढ़ लेता हूँ चुप्पी की चादर
मैं लोगों की बातें सुनते हुए मुस्कुराता हूँ
और चुप रहता हूँ
मैं बोलने से ज़्यादा
अपनी चुप्पियों से करता हूँ प्यार
क्योंकि जब मैं बोलता हूँ
टूट जाता है
शीशम के पेड़ पर लगा किसी मैने का घोंसला
या मार दिया जाता है कोई खरगोश किसी शिकारी के हाथों
या खिला दिया जाता है ज़हर कई मवेशियों को
और तोड़ दी जाती है घड़ी
समय के रुकने से पहले!
मेरा बोलना खतरनाक है
संसार में हो रहे सभी चीजों के लिए
इसलिए मैं चुप रहना चाहता हूँ।
कविताओं ने चुना प्रकृति के बीच रहना
एकांत में बैठे
नदी के किनारे
सड़कों पर चलते वक़्त
कई कविताओं का हुआ निर्माण
ये निर्मित कविताएं
संसार की सबसे खूबसूरत कविताएं थीं
जिसे नहीं लिखा गया
किसी भी डायरी, नोटबुक या मोबाइल में
ये कविताएं लिक्खी जाने से पहले खो गयीं
निर्मित जगह और पन्ने के बीच आने वाले
सभी वस्तुओं के अंदर
कुछ पंक्तियों को फूलों ने चुना
कुछ आम के पेड़ के ऊपर चढ़ गयीं
कई पंक्तियां नदी के लहरों के साथ बह गयीं
और कुछ को सड़क के किनारे बैठे भिखारी ने मांग लिया
इस तरह टुकड़ों में बँटते हुए
उन खूबसूरत कविताओं ने चुना
प्रकृति के बीच रहना।
दो किनारों पर
शहर के आख़िरी छोड़ पर
तुम्हारा इंतज़ार करते हुए
मैंने लिखी कई कविताएं
और उनमें लिखा सिर्फ़ प्रेम
बस लिखता रहा प्रेम
न तुम नहीं आईं
न ही मैं आ सका तुम्हारे पास
हम दोनों सड़क के दो किनारों पर बैठे
सड़क के ख़त्म होने का कर रहे इंतज़ार।
हांडी में दफनाई जाने वाली लड़कियाँ
हांडी में दफनाई जाने वाली लड़कियाँ
मानवता के इतिहास को नकारना चाहती हैं
मैंने उनके मृत आँखों मे देखा है
पिता के रक्तरंजित हाथों से
समेटी गयी मुद्राएं
उनकी लहू से ही लिखा गया है
मुद्रा का इतिहास
हांडियों को अर्थशास्त्र का स्तंभ कहा जाता है ।
• गाँव में नवजात बच्चे के मृत्यु के बाद उसे हांडियों (घड़ा) में दफ़नाया जाता है। लेकिन ज़्यादातर नवजात बच्चियां मरती नहीं हैं, उन्हें मार दिया जाता है ताकि उनकी शादी और दहेज में पैसे न खर्च करने पड़े।
भागती चीजें स्थिर चीजों के मौत का कारण है
धूल में सिमटी हुई यादें
मेरे चौखटे पर
कर रही इंतज़ार
कमीज को फिर से
धूल से रंगने का
उनकी आवाजें
गुम हो गयी हैं
मेरे मोबाइल के तड़कते-भड़कते गाने के शोर में
मैंने यादों को
मरने छोड़ दिया
मोबाइल स्क्रीन के
भागते रंगों के बीच
इस प्रक्रिया ने मुझे बताया
भागने वाली चीजें
स्थिर चीजों के मौत का कारण है
जैसे दौड़ती हुई ट्रेन
और भागता हुआ पंखा
किसी पटरी के बीच
किसी बन्द कमरे के अंदर
रुके हुए को मार देती है।
सत्यम कुमार सत्यार्थी
युवा रचनाकार। कादम्बिनी सहित कुछ पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। संप्रति- पटना विश्वविद्यालय में जन संचार विषय के छात्र।
बेगूसराय, बिहार में निवास।



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