अपना आदमी

अरे तुम तो अपने आदमी निकले! 
जरा सम्भल कर चलाया करो
खैर, 
कोई और होता तो अभी ही दो-चार थप्पड़ जड़ देते, 
और मुआवजा लिए बगैर तो बिल्कुल न छोड़ते

अच्छा तो वह तुम्हारी दुकान है, 
अरे अपनी ही हुई! 
नाहक ही मैं दूसरी दुकानों पर पैसे फूंकता रहा, 
तो कुछ कम-ज़्यादा तो कर ही दोगे

अरे तुम यहाँ पढ़ाते हो! 
भई, अपना गोपु भी यहीं पढ़ता है
चंचल है जरा! देख लेना, अपना ही तो है

आजकल चावल-तेल तो आसमान छू रहे है, 
अब तो तुम्हारे ही राशन दुकान का सहारा है, 
आखिर अपनी ही हुई न! 

अरे, रेप ही न किए हो! 
कोई नहीं, पुलिस- प्रशासन में अपना आदमी है, 
चिंता न करें, मामला सलट जाएगा

अरे अपनी ही लड़की है, काहे घबराते हो! 
किसी को कुछ नहीं बोलेगी, घबराओ मत

अरे अपना नाम खूब है, 
पैसों की चिंता न करें! 
बस ऑपरेशन, दवाईयां, एम्बुलेंस, बेड चार्ज और डाक्टर विजीट जैसी मामुली चीजें देख लेना...



चित्र

एक चित्र जो कोई सीखता है, बनाता है
एक चित्र जो कोई बनाता है, मैं देखता हूँ
एक चित्र जो मैं देखता हूँ, दिखाता हूँ
देखते-दिखाते एक चित्र, चित्र ही रह जाता है...



खिलो इस तरह

खिलो तुम और छा जाओ हर तरफ
बिखर जाओ हर जगह ऐसे
जैसे विचार बिखरते हैं
कभी टुकड़ों में, तो कभी क्रमगत
फैल जाओ कभी दरवाजों पर
ढक लो उन खिड़कियों को जो हमेशा बंद ही रहा करते हैं।
गिरो ज़मीन पर इस तरह कि तुम्हारी खूबसूरती तब भी बनी रहे
कि तब भी तुम सहेज़ कर उठाए जाओ
रंग दो घर, दीवार, आंगन और हर वो जगह जहां बार-बार मुरझा कर भी हर बार खिल सको!


गुस्से और आवेग को बचाए रखना ज़रूरी है...

गुस्से और आवेग को बचाए रखना ज़रूरी है
यहीं से संघर्ष करने, लड़ने की ताकत और ऊर्जा मिलेगी
ले लेने दो इन अमानुषिक हत्यारों को हम पर यंत्रणा पहुंचाने के तमाम उपक्रमों का अवसर
यह भी सच है कि तेज बारिश से नदियों में आए उफान भी चुटकियों में बांध को तबाह करने की क्षमता रखते हैं
चक्रवात बड़े-बड़े ,गहरे जड़युक्त पेड़ों को भी उखाड़ फेंकने से नहीं थकता है
आग की आंच में जब एक छोटा सा मामूली पतंगा जलता है तो यह बड़े-बड़े लोहे की इमारतों को भी पिघलाने का भरपूर साहस बन धधकता है।
पत्थर टूटता है तो तोड़ता भी है,
मिट्टी ढह सकती है तो ढहा भी सकती है
हवा धीमी गति से बहती है, तो तेज तूफान बन अपनी तीव्रता का परिचय भी देती है
जरूरी है उसकी उत्तेजना उसकी गति, समायोजित और सही दिशा में गमन करें।

सोमा राय

युवा रचनाकार। हिन्दी में परास्नातक। सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल में निवास।