1.

उनको दुख के हमसे वो कहते ये कैसे हम ग़लत थे

इसलिए पहले ही हमने कह दिया के हम ग़लत थे


वो ख़फ़ा हैं जाने कब से, क्या पता किस बात पे हों

फ़र्ज़ बनता है हमारा कह दे उनसे हम ग़लत थे


तुम इशारा कर तो देते के नहीं जाना है तुमको

रोक लेते हम तुम्हें, कह देते सब से हम ग़लत थे


हम किसी भी तौर उसको साथ रखना चाहते थे

हमने माफ़ी मांग ली ऐसे कि जैसे हम ग़लत थे


बोल कर हमको ग़लत गर होते हैं खुश आप भी तो

सोचना क्या आप भी ये बोल लीजे हम ग़लत थे


हम लड़ेंगे ख़ूब दोनों, पहले तो इक दूजे से, फिर

रोते रोते ये कहेंगे हम ग़लत थे, हम ग़लत थे।



2.

दौर-ए-हाज़िर आशिक़ी के आख़िरी स्टेज पे हूं

यानी मैं उस बेबसी के आख़िरी स्टेज पे हूं


ज़िम्मेदारी की हवा से चल रही है सांसे अब तक

वरना मैं तो ख़ुदकुशी के आख़िरी स्टेज पे हूं


है उसे भी कुछ तो कहना, औ' मुझे भी है मोहब्बत,

यानी उस से दोस्ती के आख़िरी स्टेज पे हूं


बंट रहा है दिल मेरा जैसे किसी लड़की का नंबर

तेरे बाद आवारगी के आख़िरी स्टेज पे हूं


ख़त्म होने वाली है अब जल्द ही ये फिल्म मेरी

अब मैं अपनी ज़िन्दगी के आख़िरी स्टेज पे हूं।



3.

रोते रहता है दीवार से लगकर पागल है

सुनता हूं अपने बारे में अक्सर पागल है


जिसको पाने की खातिर कब से पागल था मैं

उसने मुझसे हाथ छुड़ाया कहकर पागल है


जो हमको नइ करने थे वो सारे काम किए

कौन भला दुनिया में हम से बढ़कर पागल है


तेरी राहें तकते-तकते हो गए पत्थर हम

अब तो इसको हाथ लगा दे पत्थर पागल है


एक परी ने जब से उसमें पांव भिगोएं हैं

चाट रहा है साहिल यार समन्दर पागल है।


4.

हमीं करते थे दिन रौशन तुम्हारा

हमीं से भर गया अब मन तुम्हारा


उदासी आ लगे मेरे गले से

हो खुशियों से भरा दामन तुम्हारा


नहीं जाती तुम्हारी ख़ुशबू याँ से

है मेरे पास पैराहन तुम्हारा


किसी ने पूछा था हमसे ख़ुदा है?

ज़ुबां पे नाम था रस्मन तुम्हारा


दिलों को तोड़ना तुम जानते हो

यही तो है मेरी जाँ फ़न तुम्हारा


हैं सीता की तरह हम घर से निकले

तो यानी राम सा था मन तुम्हारा


उसी आंगन के टुकड़े कर रहे हो

जहां खेला कभी बचपन तुम्हारा।



5.

इश्क़ मुझसे है नहीं गर मत करो तुम बात भी

हक़ मुझे जब ना मिला, नइ चाहिए ख़ैरात भी


उसको सोचूं तो ख़ुदा की याद आती है मुझे

वो जो मुझसे दूर भी है और मेरे साथ भी


एक मंज़र जो नहीं होता है ओझल आंखों से

और फिर थमती नहीं इन आंखों से बरसात भी


जो उदासी में है लगता आ के सीने से मेरे

खुश हो जाए तो छुड़ाने लगता है वो हाथ भी


चाहता हूं मैं कभी ना खत्म हों ये बारिशें

बस में लेकिन हैं नहीं ये वस्ल के लम्हात भी


एक तो काटे नहीं कटते हैं हमसे ऐसे दिन

फिर सितमगर बन के आ जाती है काली रात भी



6.

हो कभी गर तुझको दरिया की रवानी देखना

तो तू हम जैसे दी'वानों की कहानी देखना


चढ़ते देखी एक चींटी मैंने उस दीवार पर

उस से सीखा ख़्वाब मैंने आसमानी देखना


देखने भर से तुम्हें है मिलता इस दिल को सुकून

चाहता हूं तुमको सारी ज़िन्दगानी देखना


शे'र के पहले ही मिसरे में लिखा है उसका नाम

फिर नहीं है अब तो मुमकिन इसका सानी देखना


बैठना आ के किसी शब साथ मेरे और फिर

इन खुश आंखों से तू गिर्ये की रवानी देखना


चाहिए जितना मैं उसको बातों में हूं ला चुका

अब बदन पे वस्ल की है बस निशानी देखना



7.

दिल के ख़ातिर ये बदन है क़ैद-ख़ाने की तरह

सो लगा है फड़फड़ाने ये परिंदे  की तरह


हो परी कोई या कोई फूल ही हो, क्या हुआ

कोई भी प्यारा नहीं है उसके चेहरे की तरह


चांद है जो आसमां में वो तो है उसकी जबीं

और तारे हैं ये सारे उसके झुमके की तरह


देखता ही क्यूं न जाऊं बैठ के मैं बस उसे

उसका चेहरा है हसीं कोई नज़ारे की तरह


बात अना की इससे बढ़कर और होगी क्या भला

हो के मुफ़लिस जी रहे हैं शाहज़ादे की तरह


काटती हैं बाद तेरे रोज़ ही रातें मुझे

याद तेरी सीने पे चलती है आरे की तरह


हम इन आंखों से उसे हर रोज़ पढ़ते आए हैं

वो बदन तो याद है दो के पहाड़े की तरह



8.

हैं बहुत काम ज़िन्दगी के पास

नहीं रुकना है बस मुझी के पास


मिलने आना तो ऐसे आना तुम

छोड़ के वक़्त को घड़ी के पास


रोक रक्खा था वक़्त जिसके लिए

नहीं है वक़्त अब उसी के पास


दोस्त हम हैं किसी के ठुकराए

जा नहीं सकते अब किसी के पास


देखना कौन चाहे वक़्त अपना

आंख जाती है ख़ुद घड़ी के पास


याद आती हैं झील सी आंखें

बैठे रहते हैं हम नदी के पास



9.

रब्त को ऐसे रुस्वा मत कर 

गुस्सा कर ले झगड़ा मत कर


हाथ पकड़ ले पागल मेरा

मर जाऊंगा तन्हा मत कर


उसकी पलकें झुक जाती हैं

उसको ऐसे देखा मत कर


पेशानी पे बल आएंगे

इतना भी तू सोचा मत कर


तुझको मुझसे प्यार हुआ है

रोक ले ख़ुद को ऐसा मत कर


अगर बनाया तो काम में ला

मुझको यूँ हीं ज़ाया मत कर


मैं था वो थी रात हसीं थी 

इसके आगे पूछा मत कर।



10.

हँसी नाराज़ है मुझसे

खुशी नाराज़ है मुझसे


सभी नाराज़ रहते हैं

तू भी नाराज़ है मुझसे?


मैं जिसको देख जीता हूं

वही नाराज़ है मुझसे


नहीं है प्यार कहती है

कुड़ी नाराज़ है मुझसे


बुझाती अब नहीं है प्यास

नदी नाराज़ है मुझसे


नहीं आएगा मेरा वक़्त

घड़ी नाराज़ है मुझसे


सबब ये है उदासी का

कोई नाराज़ है मुझसे



11.

बुरा है हाल इस दर्जा हमारा

कोई भी शख़्स नइ होता हमारा


हमारे दरमियां दुनिया खड़ी है

बहुत मुश्किल है जां मिलना हमारा


उसे भी रास्ता कोई न देगा

वो जिसने रोका है रस्ता हमारा


अचानक कह दिया के फिर मिलेंगे

नहीं था ठीक फिर रुकना हमारा


रखी थी ले के कॉपी हम ने उसकी

खुशी से झूम उठा बस्ता हमारा


तो क्या ये बात भी कहनी पड़ेगी?

तेरे बिन जी नहीं लगता हमारा


हमें है याद वो इक आख़िरी कॉल

और उस के बाद का रोना हमारा


तुम्हें तो सच में ऐसा लगता है ना?

कभी भी दिल नहीं दुखता हमारा।


- अंकित मौर्य

अंकित मौर्य