एक हमें लगा, कविताओं में वें गरीबी को कोस रहें हैं पता नहीं था हर्फ़ के पीछे मोटी रॉयल्टी खोंस रहें हैं। दो मेरी चुप में दफन है सदियों से सियराया मेर…
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