मेरे हिस्से की दुनिया हो तुम मेरे हिस्से की दुनिया हो तुम मैं तुम्हारे हिस्से की किस्मत का दाग तुम मुझसे महल की अपेक्षा करती हो मगर मेरी वसीयत मे…
पूरी रचना पढ़ें...१. कहीं से और ही लाया गया हूँ मैं हर इक बार ठुकराया गया हूँ हुआ है कत्ल मेरा ही यहाँ पर मगर कातिल भी मैं पाया गया हूँ मैं अपने शौक पूरे कर न पाया म…
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