मुसलमानों की गली आज वह शहर की उस गली में गया जहाँ जाने से लोग अक्सर कतराते हैं पान की गुमटी में बैठी एक बुढ़िया पढ़ रही है उर्दू की कोई किताब उसके…
पूरी रचना पढ़ें...अजीब बात मैं सुना रहा हूँ तुम्हारे कान बन्द हैं! मैं दिखा रहा हूँ तुम किये जा रहे अनदेखी! मैं हाँफ रहा हूँ तुम्हें आ रही हँसी! मैं पिस रहा हूँ तुम पी…
पूरी रचना पढ़ें...घर जो खो चुका है ग़नीमत इतनी रही कि मैं बचा रह गया बस मेरा घर खो गया है मेरे ही शहर में अपने खो चुके घर को चाँद पर खोजने गया यह सोचकर कि चाँद भी तो अ…
पूरी रचना पढ़ें...१. मैं गौर से देख रहा हूँ अनगिनत चेहरों को ऐसे आशंका, भय, सन्त्रास और यातना के मिले-जुले भाव के बीच रत्ती भर उम्मीद यही उम्मीद इन्हें आहों-कराहों के…
पूरी रचना पढ़ें...१. बावन पत्ते ताश के और दो जोकर - कुल होते है चौपन मतलब बीत ही गए दांव लगाते हुए हार हर पल इतनी मिली कि गौरव बन गई सुनो बाबू उम्र चौपन की होगी अब प…
पूरी रचना पढ़ें...1. आज के मुक्तिबोधो, नागार्जुनो त्रिलोचनो, गोरख पांडेयो! तुम सबकी खैर नहीं कविता की दुनिया इतनी बदल दी जाएगी कि तुम संदिग्ध हो जाओगे घुसपैठिये नज़र आ…
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